18.7.22

P-129 मेरी प्यारी पतंग

मेरी प्यारी पतंग उड़ रही थी मेरी डोर से,
कटकर अब उड़ती है किसी और की डोर से। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-129

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