3.7.22

P-124 सदा कुछ नहीं

सदा कुछ नहीं रहता, न गर्मी, न घमंड, न अकड़, 
और न एटीट्यूड, न रुआब, और ना ही "ज़िन्दगी" ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-124

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