ये तेरी बेवफ़ाई थी जिसने मुझसे इतनी ग़ज़लें लिखवाईं हैं,
मैं तेरा मशक़ूर हूँ, जो तूने मुझे इतनी शोहरतें दिलवाईं हैं।
मैं तेरा मशक़ूर हूँ, जो तूने मुझे इतनी शोहरतें दिलवाईं हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-109
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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