16.4.22

P-077 आज इंसान सब कुछ

आज इंसान सब कुछ अपने मुताबिक चाहता है,
अपने लिए खुशी, तो दूसरे के लिए ग़म चाहता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-077

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K-007 सूरज को मैं

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