5.2.22

T-015 थक गया हूँ

थक गया हूँ, बड़ा लंबा था सफ़र,  
हवेली से निकल गैरेज में बसने का!
जाने कितना है क़याम यहां भी रहने का।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-015

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