4.2.22

P-058 घोंसला बन जाता है

घोंसला बन जाता है और बस भी जाता है,
तिनके कहाँ से आएंगे, सोचा नहीं जाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-058

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