मुझे नहीं चाहिए चांद-सूरज मेरे दोस्त,
एक झिर्री ही काफ़ी है उजाले के लिए।
गर तुम आजाओ मेरी उदास ज़िंदगी मे,
तो मुझे और क्या चाहिए जीने के लिए।
एक झिर्री ही काफ़ी है उजाले के लिए।
गर तुम आजाओ मेरी उदास ज़िंदगी मे,
तो मुझे और क्या चाहिए जीने के लिए।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-049
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