13.1.22

S-074 दिल को भी

दिल को भी बगैर दर्द सुकूँ नहीं मिलता,
अब ये भी बेचारा ख़ूगर-ऐ-दर्द हो गया है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-074

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