12.1.22

S-070 मेरी वफ़ा तो

मेरी वफ़ा तो मुझे शायर न बना सकी कभी,
मगर उसकी बेवफ़ाई ने मुकम्मल शायर बना दिया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-070

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...