20.1.22

Q-039 इसी ज़मीं पर

इसी ज़मीं पर कब्रिस्तान, इसी पे चमन है,
मुफ़लिस भी ज़मींदार भी इसी में दफ़न है,
दौलतमंदी के ख्वाहिशमंद इंसाँ को देखो,
साथ कुछ नहीं, बदन पर उसके कफ़न है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  Q-039

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