25.1.22

P-052 इतनी इज़्ज़त भी

इतनी  इज़्ज़त भी न दो किसी को कि हज़्म भी न कर सके उसे,
इतनी ज़्यादा तारीफ़ भी न करो उसकी कि सच ही समझ बैठे उसे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-052

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