20.1.22

P-048 अपनों का हमकदम

अपनों का हमकदम रह, ऐसा न हो वो पीछे छूट जाऐं,
रिश्तों को इतना भी ज़्यादा मत परख़ कि वो टूट जाऐं।

-वीरेंद्र सिन्हा"अजनबी" P-048

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