6.12.21

T-011 तेरी ही मर्ज़ी

तेरी ही मर्ज़ी से सारी दुनियां चले, 
ये ज़रूरी नहीं,
दुनियां की भी तो अपनी रज़ा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  T-011

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...