6.12.21

S-063 दुश्मनों से

दुश्मनों से बच सकते हो, खुद से बचना है मुश्किल।
न बढ़ाओ यादों का दायरा,यादों को भूलना है मुश्किल।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-063

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...