7.12.21

S-065 महज़ उजालों के

महज़ उजालों के मुरीदों, ज़रूरी तो ज़िन्दगी में थोड़े से अंधेरे भी हैं,

सफ़र-ऐ-ज़िन्दगी के दौराँ, हरेक रौशनी में लिपटे थोड़े से अंधेरे भी हैं।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-065

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