22.12.21

P-041दर्दभरी दुनियां

दर्दभरी दुनियां में सभी पराए हो जाते हैं,
बस एक दर्द ही है, जो पराया नहीं होता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-041

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K-007 सूरज को मैं

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