30.11.21

S-061 चेहरा है कुछ यूँ

चेहरा है कुछ यूं उसका पता नहीं ग़म में है कि ख़ुशी में है।
उसे पढ़ना मुश्किल है, जाने वो ख़ुदी में है कि बेख़ुदी में है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी S-061

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