20.11.21

S-048 यक़ीनन चंद

यक़ीनन चंद नामवर ज़ईफ़ शायर शायरी भी खूब करते हैं,
मगर जाने क्यों,  वक्ते-आखिरी में गद्दारी भी खूब करते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-048

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K-007 सूरज को मैं

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