26.11.21

Q-031 ज़िन्दगी के दो ही

ज़िन्दगी के  दो ही साज़,
एक मैं, एक मेरी आवाज़,
तन्हाई ने सहारे छीन लिए,
और ख़ामोशी ने अल्फ़ाज़।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  Q-031

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K-007 सूरज को मैं

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