कहने को तो बस ख़ामोशी है,
पर हर लम्हा कुछ बोलता है।
फ़रावानी हो अगर जज़्बात की,
तो दिल सर चढ़कर बोलता है।
पर हर लम्हा कुछ बोलता है।
फ़रावानी हो अगर जज़्बात की,
तो दिल सर चढ़कर बोलता है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-029
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment