औरत के बिना घर नहीं चलता,
औरत के बिना चूल्हा नहीं जलता,
फेसबुक इंस्टाग्राम हैं क्या चीज़,
औरत के बिना संसार नहीं चलता।
औरत के बिना चूल्हा नहीं जलता,
फेसबुक इंस्टाग्राम हैं क्या चीज़,
औरत के बिना संसार नहीं चलता।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-020
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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