दोनों ही हैं गुनाहगार, तू भी मैं भी,
कोई दूध का धुला नहीं, तू भी मैं भी।
किसपे उठाएं उंगली, दौरे-हाज़िर में,
हमाम में सब नंगे हैं, तू भी, मैं भी।
कोई दूध का धुला नहीं, तू भी मैं भी।
किसपे उठाएं उंगली, दौरे-हाज़िर में,
हमाम में सब नंगे हैं, तू भी, मैं भी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-015
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