4.9.21

P-002 संसद तो बन्द

संसद तो बंद है, हंगामा कहाँ किया जाय,
चलो, सड़कों पर ही क्यों ना किया जाय। 

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-002
 

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...