5.8.21

S- 037 मेरे दर्द-ओ-ग़म

मेरे दर्द-ओ-ग़म किसी शायरी से कम नहीं,


खुद मिलती है दाद उन्हें मोहताज हम नहीं।



-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-037









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