किताबों की बातों से हटकर,
कहता मैं सच्ची बात ये खुलकर।
जीवन बड़ा कष्टमय है यदि वो,
जिया जाय भावनाओं में बहकर।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-014
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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