22.7.21

Q-018 लौ चिराग़ की

लौ चिराग़ की योंही तेज़ न हुई है,

इशारा है चराग़ के बुझ जाने का।

मेरी हिचकियाँ भी बे-सबब नहीं,

इम्कान है एक और ज़ख्म पाने का।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-018


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