25.6.21

S- 020 तीरगी दूर

तीरगी दूर हो जाएगी, उम्मीदों की शुआएँ आने लगीं हैं,
शादमान हो जा "अजनबी" राहतों की हवाएँ आने लगी हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-020


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