6.6.21

S-011 छुपा सका है

छुपा सका है कौन दर्द के अफ़सानों को,
ज़ुबाँ मिल जाती है आंसू भरी मुस्कानों को।

-वीरेंद्र सिन्हा "अकनबी"  S-011

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