20.6.21

Q-011 रहने दो यार

रहने दो यार बखान हुस्नवालों का,
कभी इनके किरदार पर भी बोला करो।
ढहाते हैं ये ज़ुल्म जिन कद्रदानों पर,
कभी उनके दर्दे-सब्र को भी टटोला करो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  Q-011

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