23.5.21

S-006 अजीब है हम

अजीब हैं हम,  हमने भी अजूबे क्या क्या किये,
ख़ुद को ही खो कर, ख़ुद को ही ढूंढा किये।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-006

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...