16.5.21

Q-004 न किसी शख्स

न किसी शख्स में चाहने की कूबत है,
न किसी मे चाहत पाने की सलाहियत है। 
दौरे-हाज़िर में सब हैं तिजारती लोग,
मौकापरस्तों और खुदगर्ज़ों की सल्तनत है।

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-004

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...