13.4.24

S-318 ज़िन्दगी तो इतनी लंबी

ज़िन्दगी तो इतनी लंबी देदी, ऐ ख़ुदा, मगर
साथ "ज़िन्दगी" का इतना कम क्यों दे दिया?

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-318

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...