शायद पहचान सकेंगे अपनी एहमियत हम भी कभी,
औरों की तरह जब हो जाएंगे बेमुरव्वत हम भी कभी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-248
औरों की तरह जब हो जाएंगे बेमुरव्वत हम भी कभी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-248
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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