खोल कर रख दरवाज़ा ऐ "अजनबी",
'"उसको" दस्तक देने की आदत नहीं है।
'"उसको" दस्तक देने की आदत नहीं है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-240
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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