8.11.23

Q-142 ख़ुदा ने ख़ुद ही

ख़ुदा ने ख़ुद ही इंसाँ के साथ बड़ी बेइंसाफ़ी की है,
किसी को इंसानियत नहीं दी, किसी को भर भर के दी है।
एहसासो-जज़्बात बांटते वक्त भी उसने की तरफ़दारी,
किसी को बना दिया संगदिल तो किसी को नरमदिली दी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-142

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...