आजकल किसी गूंगे से ही दोस्ती बेहतर है,
ये डर तो नहीं वो कब बात करना छोड़ देगा,
डर के रहो "अजनबी" तुम ख़ुदा की मार से
कौन जाने वो कब रुख हवाओं का मोड़ देगा।
ये डर तो नहीं वो कब बात करना छोड़ देगा,
डर के रहो "अजनबी" तुम ख़ुदा की मार से
कौन जाने वो कब रुख हवाओं का मोड़ देगा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-077
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