28.10.23

M-077 आजकल किसी गूंगे

आजकल किसी गूंगे से ही दोस्ती बेहतर है,
ये डर तो नहीं वो कब बात करना छोड़ देगा,
डर के रहो "अजनबी" तुम ख़ुदा की मार से
कौन जाने वो कब रुख हवाओं का मोड़ देगा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-077

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