उम्र पूरी बीत जाती है सिर्फ़ तजुर्बे करने में,
वक़्त कहाँ मिलता है उनसे सीखने के लिए।
काश ! ज़िन्दगियाँ भी दो-दो हुआ करतीं ,
एक समझने के लिए, एक जीने के लिए।
वक़्त कहाँ मिलता है उनसे सीखने के लिए।
काश ! ज़िन्दगियाँ भी दो-दो हुआ करतीं ,
एक समझने के लिए, एक जीने के लिए।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-125
No comments:
Post a Comment