2.6.23

S-270 ज़रा यकीन रख

ज़रा यकीन रख 'अजनबी' मंज़िल कहीं मिलेगी ज़रूर,
जब ये रास्ते बने हैं तो मंज़िल भी कहीं दिखेगी ज़रूर।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-270

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