संगदिलों का सरोकार शायरी से है नहीं,
और ऐसे मौकापरास्तों का शायर मै नहीं,
वाह-वाह करेंगे कैसे मेरी शायरी पर वो,
जज़्बा-ऐ-मुहब्बत जिनमे क़तई है नहीं।
और ऐसे मौकापरास्तों का शायर मै नहीं,
वाह-वाह करेंगे कैसे मेरी शायरी पर वो,
जज़्बा-ऐ-मुहब्बत जिनमे क़तई है नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-119
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