12.6.23

M-063 लीन हो जाता हूँ

लीन हो जाता हूँ संवेदनाओं में, मैं
बह क्यों जाता हूँ भावनाओं में, मैं
विस्तार क्यों देता हूँ आशाओं को,
बंध क्यों नहीं जाता सीमाओं में, मैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-063

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