6.5.23

S-265 माना कि ख़ामोशी

माना कि ख़ामोशी ना तोड़ने की ज़िद है तुम्हारी,
पर किसी का दिल रखने को, मुस्कुरा तो सकते हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-265

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