22.2.23

M-050 कब तक रहेगा

कब तक रहेगा बरबाद ऐ दिल,
वक़्त रहते कुछ तो संभल जा।
कब तक रोएगा गुज़रे दौर को,
जहाँ बदला तूभी तो बदल जा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-050

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