15.12.22

S-210 ख़ामोशी नाते तो

ख़ामोशी नाते तो खत्म कर सकती है,
मगर इससे रिश्ते कभी खत्म नहीं हुआ करते। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-210

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...