8.12.22

Q-085 बहुत आगे निकल

बहुत आगे निकल गए हैं लोग इश्क़ में,
एक हम ,बस अल्फ़ाज़ पर इटके रहते हैं। 
'तिजारत' में एहसासात की क्या कीमत,
एक हम, कि जज़्बात पकड़के बैठे रहते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-085

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