8.12.22

P-175 अब बहारें न आएंगी

अब बहारें न आएंगी इस तरफ़,
आओ ख़िज़ाओं अपनी मंशा पूरी कर लो।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-175

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...