26.10.22

S-181 लौट-लौट कर

लौट लौट कर आ जाते हैं ज़िन्दगी में,
के अब अंधेरे भी डरते नहीं उजालों  से।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S -181

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