22.10.22

S-180 मुझे क्यों हो

मुझे क्यों हो ग़म भला तुझसे जुदाई  का, 
तेरी तस्वीर जब है इलाज मेरी तन्हाई का।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-180

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...