27.10.22

P-152 इतनी न करो

इतनी न करो अदावत कि फिर बात बननी मुश्किल हो जाए,
ज़मीर को न गिराओ इतना, कि आंख उठनी मुश्किल हो जाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-152

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...