21.10.22

P-147 जब दुनियाँ छोड़

जब दुनियाँ छोड़ देती है तन्हा, 
ग़म ही हैं जो साथ देते हैं वहां।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-147

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K-007 सूरज को मैं

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