20.9.22

S-172 ग़मों से दूर

ग़मों से दूर, शाद-ओ-आबाद रहे तू ऐ दोस्त,
मेरा क्या, तुझे सोचकर ही मसरूर  रह लूंगा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-172

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K-007 सूरज को मैं

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